कोल्हानम ख़रीदे

पुस्तक का विवरण :

Kolhanam( कोल्हानम)

Language – Hindi

Author- Mithilesh

Publisher- Gyanjyoti Educational and Research foundation, Jamshedpur

ISBN : 978-93-5416-405-7

ISBN: 978-93-5457-769-7

Price: 300(INR)

सदियों से झारखण्ड के पहाड़, पठार और आरण्यक विभिन्न वनवासी समूहों के निवास-स्थान रहे हैं। कोल्हानम की कहानी इन्ही धरतीपुत्रों के शौर्य, बलिदान और सनातन धर्म-संस्कृति के लिए मर मिटने की गाथा है। यह वह कहानी है, जो लिखित इतिहास में नहीं, बल्कि इन वनवासियों की लोक-कथाओं, लोक-कलाओं तथा लोकगीतों में कहानियों की शक्ल में आदि काल से दर्ज हैं, तथा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक निरंतर प्रवाहित होती रही हैं। भारतीय भारतीय पुरातात्विक विभाग द्वारा इस प्रदेश में कई प्रागैतिहासिक असुर-स्थलों, शिलाचित्रों, प्राचीन मंदिरों आदि की खोज की गई है. कोल्हानम में इन्हीं पुरातात्विक साक्ष्यों की पृष्ठभूमि में इन वनवासियों की शौर्य-गाथाओं को एक बेहद रोचक कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस उपन्यास में जिन ऐतिहासिक घटनाओं और स्थानों का जिक्र किया गया है, वे किसी न किसी रूप में भारतीय पुरातात्विक विभाग के नवीनतम उत्खननों, प्राचीन बौद्ध ग्रंथो, इतिहास की मानक पुस्तकों में उपलब्ध है तथा आधुनिक इतिहासकारों द्वारा उद्धरित है। इस उपन्यास में वर्णित स्थान, जैसे: मुंडेश्वरी मंदिर (कैमूर), टंगीनाथ धाम (गुमला), हंसा (खूंटी), सरिद्केल (खूंटी), तसना एवं करकरी, नदियाँ (खूंटी), सीताकुंड (हजारीबाग),सरजमहातू (चाईबासा), हाराडीह (राँची) इत्यादि वर्तमान झारखण्ड राज्य में पुरातात्विक महत्व के स्थान हैं।उपन्यास को रोचक बनाने तथा ऐतिहासिक स्थानों एवं घटनाओं को एक कहानी का रूप देने के उद्देश्य से लेखक द्वारा कुछ काल्पनिक घटनाओं एवं काल्पनिक चरित्रों की मदद ली गई है। इस उपन्यास में इस क्षेत्र की दो प्रमुख जनजातियों; असुरों और मुंडाओं के मगध के मौर्य, शुंग और कण्व और दक्षिण के आंध्र-भृत्य सातवाहन राजवंशों के साथ ईसा-पूर्व संबंधों का दिलचस्प वर्णन है। कोल्हानम् में सम्राट अशोक, पुष्यमित्र शुंग और आंध्रभृत गौतमी-पुत्र शतकर्णी का चरित्र-चित्रण रूढ़िबद्ध न होकर बल्कि आधुनिक अनुसंधानों के आधार पर किया गया है। कोल्हानम् की कहानी में ‘तिस्स’ जैसे कुछ ऐसे चरित्रों को भी शामिल किया गया है, जिनकी चर्चा बौद्ध इतिहासकारों द्वारा की गई है, लेकिन उन्हें इतिहास की किताबों में अधिक महत्व नहीं दिया गया है।इस कहानी में ‘नागवंश’ और ‘बौद्ध धर्म के कुछ अनुयायियों की चर्चा राष्ट्रीय एकता और अखंडता के आलोक में अलग सन्दर्भ में गई है. वैदिक, बौद्ध, जैन, आजीवक, आदि बृहद सनातन धर्म समाज का अभिन्न हिस्सा हैं. वर्तमान चुनौतियों को रेखांकित करता यह उपन्यास, भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं को वर्तमान सन्दर्भ में प्रस्तुत करता हैI

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